मकड़ी अपने ही जाले में क्यों नही फसती?

क्या आपने कभी सोचा है की, मकड़ी अपने ही जाले में क्यों नही फसती? Why Don’t Spiders Stick to their own webs? आइये इस पोस्ट के माध्यम से ये जानने की कोशिश करते हैं।

दरअसल दोस्तों, हर एक मकड़ी अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग पैटर्न में अपने जाले बुनती है। एक और बात है जो मकड़ी के जाले को बेहद ही गजब बनती है और वो ये है दोस्तों की मकड़ी अपने जाले को दो अलग तरह के रेशों से बुनती है, एक साधारण और दूसरा चिपचिपा।

साधारण रेशे पर कोई भी कीट पतंगा नही चिपकता और आसानी से चल सकता है। जबकि चिपचिपे रेशे पर कोई भी कीट पतंगा चिपक जाता है और यही सबसे बड़ा कारण है की जब भी कोई कीट पतंगा मकड़ी के जाले पर आता है तो वह साधारण रेशे पर तो आसानी से चल लेता है मगर जैसे ही वह चिपचिपे रेशे पर अपने पैरो को रखता है वो तुरंत ही मकड़ी के जाले में उलझना शुरू हो जाता है।

मकड़ी अपने ही जाले में क्यों नही फसती? Why Don’t Spiders Stick to their webs?

तो सवाल ये उठता है की आखिर मकड़ी अपने ही जाले में क्यों नही फसती। असल में दोस्तों, इसका सबसे बड़ा कारण मकड़ी के पैरो की बनावट है।मकड़ी के सभी पैरो के निचे दो ऊँगली नुमा आकृति होती है जो मकड़ी को उसके चिपचिपे रेशे से बचाती है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है की मकड़ी भी अपने चिपचिपे रेशे पर पूरे अच्छे तरीके से नहीं चल सकती। मकड़ी को भी अपने उस रेशे को पार करने के लिए अपनी ऊँगली नुमा आकृति का इस्तेमाल करते हुए उस रेशे पर लटकते हुए जाना पड़ता है।

एक दिलचस्प बात और है की, यदि कोई भी मकड़ी अपने ही रेशे नुमा जाले पर पुरे तरीके से अपने पैर को रखदे तो मकड़ी भी अपने जाले में फस सकती है। ऐसा नही है की मकड़ी कभी भी जाले में फस ही नहीं सकती। जैसा की पहले मैंने आपको बताया की हर मकड़ी अपनी सुविधा के अनुसार अलग अलग पैटर्न में अपने जाले को बुनती है तो ठीक उसी प्रकार से अगर एक मकड़ी दूसरी मकड़ी के जाले में जाती है और अगर वो उस मकड़ी के जाले के पैटर्न को नहीं समझती तो दूसरी मकड़ी उस मकड़ी के जाले में बहुत ही आसानी के साथ फस जाती है।

तो अब आप जान ही चुके होंगे की मकड़ी अपने ही जाले में क्यों नही फसती।

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